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रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "तबाही है उसके लिए जो बोलता है तो झूठ बोलता है ताकि इससे लोगों को हंसाए, तबाही है उसके लिए, तबाही है उसके लिए|" SUNAN ABU DAWOOD HADITH NO. 4990
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अब्दुल्लाह बिन अब्बास (R.A.) कहते हैं कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जानवरों को आपस में लड़ाने से मना फ़रमाया है| Sunan Abu Dawood Hadith No. 2562 Narrated Abdullah ibn Abbas: The Messenger of Allah صلی ‌اللہ ‌علیہ ‌وسلم prohibited to provoke the beasts for fighting. Sunan Abu Dawood Hadith No. 2562
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  image source   अबू हुरैरा रजि अल्लाह उन्होंने बयान किया कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया "इंसान के हर एक जोर(joint) पर सदका लाजिम होता है| हर दिन जिसमें सूरज सूर्योदय होता है| फिर अगर वह इंसानों के दरमियान इंसाफ करें तो यह भी एक  सदका है और किसी को सवारी के मामले में अगर मदद पहुंचाएं, इस तरह इस पर सवार कराएं या इसका सामान उठाकर रख दे तो भी एक सदका है और अच्छी बात मुंह से निकालना भी एक सदका है और हर कदम जो नमाज के लिए उठाए वह भी सदका है और अगर कोई रास्ते से किसी तकलीफ देने वाली चीज को हटा दे तो वह भी एक सदका है|" SAHIH BUKHARI HADITH NO. 2989
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अनस मालिक (R.A.) ने बयान किया के रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया: आपस में नफरत ना रखो, ईर्ष्या ना करो और पीठ पीछे किसी की बुराई ना करो| बल्कि अल्लाह के बंदे! आपस में भाई-भाई बन कर रहो और किसी मुसलमान के लिए जायज नहीं कि एक भाई किसी भाई से 3 दिन से ज्यादा सलाम कलाम छोड़ कर रहे| (Book of Bukhari: Hadees No. 6065) Narrated Anas bin Malik: Allah's Apostle said, Do not hate one another, and do not be jealous of one another, and do not desert each other, and O, Allah's worshipers! Be brothers. Lo! It is not permissible for any Muslim to desert (not talk to) his brother (Muslim) for more than three days. (Book of Bukhari: Hadees No. 6065)
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 इस्लाम के पांच स्तंभ: Five Pillars of Islam   शाहदा: 'ला इलाहा इल्लल्लाह' (अल्लाह  तआला के अतिरिक्त कोर्इ सच्चा पूज्य नहीं) और 'मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह' (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के संदेश्वाहक हैं)  सलात: मक्का शहर के काबा शरीफ के तरफ मुंह करके दिन में पांच बार नमाज पढ़ना ज़कात: अपनी माल  में से 2.5 प्रतिशत माल गरीब और जरूरतमंदों में बांटना रोजा (उपवास) : रमजान के पूरे महीने रोजे रखना (उपवास करना) हज: जीवन काल में कम से कम एक बार पवित्र शहर मक्का की तीर्थ यात्रा करना, जो शारीरिक और आर्थिक रूप से सक्षम हो उनके लिए फर्ज है  Ramzan 2020:रमजान क्या है और मुसलमानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
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"Woh Shaks JANNAT me Daakhil Nahi hoga Jiski 'SHARAARATON Se uska 'Padosi Mehfooz Na Ho" HE WILL NOT ENTER JANNAH (HEAVEN) WHOSE NEIGHBOR IS NOT SECURE FROM HIS WRONGFUL CONDUCT वह शख्स जन्नत में दाखिल नहीं होगा जिसकी शरारत से उसका पड़ोसी महफूज ना हो| शबे बारात क्या है?
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Jisko maut Is Haalat Me Aaye Ke Woh Yaqeen Rakhta Ho Ke Allah Ke Alawa Koi Ibadat Ke Laiq Nahi, Wo Jannat me Dakhil hoga. जिसको मौत इस हालत में आए की वह यकीन रखता हो कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं वह जन्नत में दाखिल होगा| “He whose last words are ‘there is no God but Allah,’ will enter Paradise.” Source: Sunan Abī Dāwūd 3116